दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट का 12वां टेस्ट:इंजन फेल होने के बाद भी हिंद महासागर में लैंडिंग, पहली बार न्यू जनरेशन स्टारशिप का इस्तेमाल

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Starship V3 के 12वें टेस्ट में दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट ने एक बार फिर इतिहास रचने की कोशिश की। यह परीक्षण सफलता और तकनीकी चुनौतियों का मिश्रण रहा। लॉन्च के दौरान इंजन में खराबी आने के बावजूद रॉकेट का ऊपरी हिस्सा हिंद महासागर में सुरक्षित लैंड करने में सफल रहा।

यह पहली बार था जब SpaceX ने स्टारशिप के नए और बड़े V3 वर्जन का इस्तेमाल किया। रॉकेट को टेक्सास स्थित Starbase लॉन्च साइट से भारतीय समयानुसार 23 मई की सुबह लॉन्च किया गया।

Elon Musk की कंपनी स्पेसएक्स द्वारा विकसित यह रॉकेट दो हिस्सों से मिलकर बना है—ऊपरी हिस्सा ‘स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट’ और निचला हिस्सा ‘सुपर हेवी बूस्टर’। दोनों को मिलाकर ‘स्टारशिप’ कहा जाता है। इसकी कुल ऊंचाई लगभग 403 फीट है और इसे पूरी तरह से रीयूजेबल बनाया गया है।

टेस्ट के दौरान रॉकेट के पहले हिस्से यानी सुपर हेवी बूस्टर में समस्या आ गई। बूस्टर अपना ‘बूस्ट बैक बर्न’ पूरा नहीं कर सका, जो उसे नियंत्रित तरीके से वापस लैंड कराने के लिए जरूरी होता है। इस वजह से बूस्टर समुद्र में पूरी तरह नियंत्रित तरीके से नहीं उतर पाया।

वहीं, बूस्टर से अलग होने के बाद मुख्य स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट के छह इंजनों में से केवल पांच ही काम कर पाए। एक इंजन स्टार्ट न होने के कारण स्पेसक्राफ्ट तय ऑर्बिटल पाथ तक पूरी तरह नहीं पहुंच सका।

हालांकि, तकनीकी दिक्कतों के बावजूद स्टारशिप सुरक्षित ‘सबऑर्बिटल’ उड़ान पूरी करने में सफल रही और लगभग एक घंटे बाद हिंद महासागर में नियंत्रित लैंडिंग की।

इस मिशन का मुख्य उद्देश्य रॉकेट को सफलतापूर्वक लॉन्च करना, स्टारशिप को बूस्टर से अलग करना और बाद में इंजन दोबारा स्टार्ट करके समुद्र में सुरक्षित लैंडिंग का परीक्षण करना था। हालांकि कुछ परीक्षण पूरे नहीं हो सके, लेकिन स्पेसएक्स के लिए यह मिशन भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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