नीमराना-बहरोड़ को जल्द मिलेगा मेट्रो का तोहफा
दिल्ली-अलवर रैपिड रेल परियोजना को मिली रफ्तार
पंचगांव में बनेगा अत्याधुनिक डिपो
उद्योग, रोजगार और प्रॉपर्टी सेक्टर को मिलेगा बड़ा बूस्ट
चुप्पी तोड़
नई दिल्ली/बहरोड़।
राजस्थान के औद्योगिक हब नीमराना-बहरोड़ और आसपास के क्षेत्रों के लिए बड़ी खुशखबरी है। दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी (शाहजहांपुर-नीमराना-बहरोड़)-अलवर नमो भारत (आरआरटीएस) परियोजना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। करीब 164 किलोमीटर लंबे इस हाई-स्पीड कॉरिडोर के शुरू होने के बाद दिल्ली, गुरुग्राम, मानेसर, रेवाड़ी, बावल, नीमराना, बहरोड़, सोतानाला और अलवर के बीच यात्रा समय में भारी कमी आएगी तथा क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।
नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनसीआरटीसी) द्वारा विकसित की जा रही यह परियोजना केंद्र सरकार तथा दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों की संयुक्त पहल है। एनसीआरटीसी की आधिकारिक योजना के अनुसार दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी-अलवर कॉरिडोर नमो भारत नेटवर्क की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है।
164 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर पर दौड़ेगी 160 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार
प्रस्तावित कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर गुरुग्राम, मानेसर, पंचगांव, धारूहेड़ा, रेवाड़ी, बावल, शाहजहांपुर, नीमराना, बहरोड़, सोतानाला, खैरथल होते हुए अलवर तक पहुंचेगा। नमो भारत ट्रेनें लगभग 160 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से संचालित होंगी। परियोजना पूरी होने के बाद दिल्ली से अलवर की यात्रा लगभग दो घंटे के भीतर पूरी होने का अनुमान है।
पंचगांव में बनेगा मेन डिपो, परियोजना में बड़ा बदलाव
परियोजना से जुड़ा सबसे बड़ा बदलाव डिपो की लोकेशन को लेकर सामने आया है। पहले मुख्य डिपो धारूहेड़ा में प्रस्तावित था, लेकिन अब इसे गुरुग्राम जिले के पंचगांव क्षेत्र में विकसित करने की तैयारी की जा रही है। एनसीआरटीसी ने डिपो के लिए लगभग 99 एकड़ भूमि की मांग की है तथा गुरुग्राम प्रशासन नई साइट का प्रस्ताव सरकार को भेज चुका है।
सूत्रों के अनुसार डिपो केवल ट्रेनों की पार्किंग का स्थान नहीं होगा, बल्कि पूरे कॉरिडोर का संचालन, 24 घंटे निगरानी, रखरखाव, तकनीकी परीक्षण और सेंट्रल कंट्रोल सेंटर भी यहीं स्थापित किया जाएगा। यहां आधुनिक वर्कशॉप, वाशिंग प्लांट, ट्रैक मेंटेनेंस सुविधाएं और अन्य अत्याधुनिक तकनीकी अवसंरचना विकसित की जाएगी।
रेवाड़ी को झटका, पंचगांव-मानेसर को मिलेगा फायदा
डिपो के धारूहेड़ा से पंचगांव स्थानांतरित होने से रेवाड़ी जिले को मिलने वाले संभावित निवेश, रोजगार और व्यावसायिक गतिविधियों का बड़ा हिस्सा गुरुग्राम-मानेसर क्षेत्र की ओर स्थानांतरित हो सकता है। वहीं पंचगांव, मानेसर और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक, आवासीय और कमर्शियल विकास को नई गति मिलने की संभावना है।
93.5 किलोमीटर रूट का सर्वे पूरा
परियोजना की प्रगति भी तेजी से आगे बढ़ रही है। गुरुग्राम साइबर सिटी से बावल तक लगभग 93.5 किलोमीटर रूट का विस्तृत सर्वे पूरा किया जा चुका है। विभिन्न स्थानों पर सॉयल टेस्टिंग की जा चुकी है तथा बिजली, पानी और अन्य यूटिलिटी शिफ्टिंग के लिए आवश्यक स्थानों की पहचान भी कर ली गई है। भूमि संबंधी अंतिम मंजूरियों के बाद निर्माण कार्य में और तेजी आने की उम्मीद है।
नीमराना-बहरोड़ को होगा सबसे बड़ा लाभ
जापानी और अन्य विदेशी निवेश के कारण नीमराना-बहरोड़ क्षेत्र पहले ही देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल हो चुका है। नमो भारत कॉरिडोर शुरू होने के बाद दिल्ली-एनसीआर से इन क्षेत्रों की दूरी और समय दोनों कम हो जाएंगे। उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी, कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी और नए निवेश का लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना शुरू होने के बाद—
– औद्योगिक निवेश में वृद्धि होगी,
– रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे,
– रियल एस्टेट बाजार को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा,
– दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान के बीच दैनिक आवागमन आसान होगा,
– गुरुग्राम और दिल्ली में कार्यरत लोग नीमराना-बहरोड़ से प्रतिदिन अप-डाउन कर सकेंगे।
प्रमुख प्रस्तावित स्टेशन
सराय काले खां, आईएनए, मुनिरका, एयरोसिटी, साइबर सिटी, राजीव चौक, खेड़की दौला, मानेसर, पंचगांव, बिलासपुर चौक, धारूहेड़ा, एमबीआईआर, रेवाड़ी, बावल, शाहजहांपुर, नीमराना, बहरोड़, सोतानाला, खैरथल और अलवर सहित लगभग 21 स्टेशन प्रस्तावित हैं। हालांकि अंतिम डीपीआर और निर्माण चरण में इनमें परिवर्तन संभव है।
मेरठ कॉरिडोर की तर्ज पर होगा विकास
दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर की सफलता के बाद अब दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी-अलवर कॉरिडोर को उसी मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। विशेषज्ञ इसे दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान के बीच आर्थिक एकीकरण की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक मान रहे हैं।
फैक्ट फाइल
परियोजना: दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी-अलवर नमो भारत (RRTS)
लंबाई: लगभग 164 किमी
अधिकतम परिचालन गति: 160 किमी प्रति घंटा
प्रमुख लाभार्थी: नीमराना, बहरोड़, सोतानाला, खैरथल, अलवर
डिपो प्रस्ताव: पंचगांव (लगभग 99 एकड़ भूमि)
सर्वे प्रगति: साइबर सिटी से बावल तक 93.5 किमी सर्वे पूरा
विशेष लाभ: उद्योग, रोजगार, लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में बड़ा उछाल।
